गड्तुम्बा/इन्द्रायण
गड्तुम्बा रेगिस्तानी इलाको में पाया जाने वाला एक कड़वा फल है| जो एक छोटे तरबूज जैसा दिखाई देता है| इसका स्वाद कड़वा होता है| इसका वैज्ञानिक नाम Citrullus Colocynthis है| हिंदी में इसके कई नाम है जैसे की इन्द्रायण, तुम्बा, गड्तुम्बा इत्यादि|
यह एक जंगली पौधा है| जो रेगिस्तानी इलाको में उगता है| यह फल औषधियों गुणों से भरपूर है| जो कई प्रकार की बीमारियों में काम में लिया जा सकता है| ज्यादातर यह कृमिनाशक के तौर पर प्रयोग में लिया जाता है| इसके अलावा इसके काफी फायदे है, जिसका विवरण निम्न प्रकार है-
- गाय, भैंस, भेड़, बकरी व ऊँट में इसका प्रयोग पेट के कीड़े मारने के लिए किया जाता है| मात्रा - भेड़ व बकरी या छोटे बछड़े में 20-25 ग्राम| गाय व भैंस - 200-250 ग्राम|
- पशुओ में पेट से सम्बंधित किसी भी समस्या (कब्ज, अफारा, दस्त) के निवारण के लिए इसका प्रयोग किया जाता हो| मात्रा - बड़े पशु में 100 ग्राम दिन में दो बार आराम होने तक|
- पशुओ में पाचन शक्ति बढाने के लिए भी इसका प्रयोग किया जाता है| मात्रा 1-2 ग्राम प्रति 100 किलोग्राम शारीरिक भार|
- पशु के थन, लेवटी या जोड़ पर सुजन को भी ठीक करता है| प्रयोग - सम्बंधित भाग पर इसकी चटनी बनाकर लगाये|
- यह पशु की रोगप्रतिरोधक क्षमता को भी बढाता है| मात्रा 1-2 ग्राम प्रति 100 किलोग्राम शारीरिक भार|
- पशुओ के जोड़ो के दर्द को भी ठीक करता है| मात्रा - 1-2 ग्राम प्रति 100 किलोग्राम शारीरिक भार|
नोट- इसे पशु को खिलाते समय मात्रा का ध्यान रखे | अधिक मात्रा विषाक्त हो सकती है| किसी भी बीमारी में पशु को खिलाने से पहले पशु चिकित्सक की सलाह अवश्य ले|



No comments:
Post a Comment