Thursday, 19 March 2026

पेशाब रुक रुक कर आना |

पशुओ में पेशाब करने में कठिनाई होना



पशुओं में पेशाब रुक रुक कर आना या बार बार थोड़ा थोड़ा पेशाब करना एक सामान्य सी बीमारी लगता है लेकिन कई बार यह बीमारी पशु के लिए बहुत ही घातक सिद्ध हो सकती है। इसलिए जब कभी आपके पशु में इस प्रकार की समस्या हो तो इसे बिल्कुल भी हल्के में न ले। क्योंकि इसका कारण बहुत भयानक हो सकता है। इसके प्रमुख कारण इस प्रकार है 

कारण--

संक्रमण - अगर पशु के पेशाब की नली में संक्रमण या पेशाब की थैली में संक्रमण है तो  पशु रुक रुक कर पेशाब कर सकता है। संक्रमण के कारण पेशाब के रास्ते में सूजन व दर्द होने लगता है जिससे पशु को पेशाब करने में कठिनाई होती है। ओर पशु पेशाब करते समय जोर लगाने लगता है।

पथरी - अगर पशु के पेशाब से संबंधित किसी भी अंग में पथरी बन जाती है तो पशु को ऐसी कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।

अगर आपके पशु में इस प्रकार का कोई भी लक्षण दिखाई देता है तो तुरंत अपने नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करे|

अगर लक्षण शुरुआती है या पशु चिकित्सक के आने में ज्यादा समय लग रहा है तो कुछ सावधानी बरतते हुए और कुछ दवाइयां देकर पशु को राहत दिलाई जा सकती है।

प्राथमिक उपचार - पेशाब की रुकावट या बंद की समस्या नर पशुओं में ज्यादा देखने को मिलती है । अगर आपके पशु का पेशन थोड़ा थोड़ा करके आ रहा है तो आप उसे निम्न दवाइयां दे।  

बड़े पशु में -

 Tab Lasix 10-10 सुबह शाम  3 दिन।

  Liq Neeri 50-50 ml सुबह शाम।

  नौसादर - 25-30 ग्राम रोजाना।

 Bolus Flunixin meglumine 2 रोजाना 3 दिन तक e.g. Bol unizif/Fluxivet/fluxivir/meglulast/megloc। Bolus norfloxacin 2-2 सुबह शाम।

छोटे पशु में -

 Tab Lasix 2-2 सुबह शाम  3 दिन।

  Liq Neeri 10-15 ml सुबह शाम।

  नौसादर - 5-7 ग्राम रोजाना।

 Tab Paracetamol 1 tab. प्रति 100 किलो शारीरिक भार।

 Tab. Norfloxacin 1 tab. प्रति 100 किलो शारीरिक भार।

ये दवाई देने के बाद भी अगर आपके पशु में कोई आराम नहीं मिल रहा या आपके पशु का पेशाब बिल्कुल ही बंद हो गया है तो यह इमरजेंसी की स्थिति है इस समय तुंरत पशु चिकित्सक को बुलावे । क्योंकि अगर आपके पशु का पेशाब बिल्कुल ही बंद हो गया है तो पेशाब के दबाव से आपके पशु के पेशाब की थैली भी फट सकती है जिससे पशु की जान को खतरा हो जाएगा।

कई बार ज्यादा गर्मी के मौसम में भी यह समस्या पशुओं देखी जा सकती है । अगर आपको ऐसा लग रहा है कि मौसम में ज्यादा गर्मी होने के बाद आपके पशु में यह समस्या हुई है तो आप अपने पशु को एनर्जी या ग्लूकोज वाली दवाई पिलाये। जैसे कि - E-booster/Enerdyna/Himshakti/ORT Large इनमें से कोई भी एक दवाई मार्केट से लाये ओर अपने पशु को 200-200ml कम से कम 5 दिन तक पिलाये।

नोट - यह ब्लॉग सिर्फ जानकारी के लिए है| अपने पशु तो किसी भी प्रकार की ड्रग देने से पहले अपने नजदीकी पशु चिकित्सक से सलाह अवश्य ले | पशुपालक खुद अपने पशु का ईलाज न करे| इससे पशु की जान को खतरा हो सकता है| अगर पशु को समस्या ज्यादा हो रही है तो तुरंत पशु चिकित्सक को बुलाये|

Monday, 9 March 2026

सरसों का तेल के पशुओ में होने वाले फायदे |

 सरसों का तेल



सरसों के तेल को इसके औषधीय गुणों के कारण आयुर्वेद में बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है| उत्तर भारत में इसे बहुत अधिक मात्रा में प्रयोग में लिया जाता है| जिस प्रकार मनुष्यों में इसके बहुत से फायदे है उसी प्रकार पशुओ में भी सरसों के तेल के बहुत ही चमत्कारिक फायदे है\ जैसे की|-

  • दूध बढ़ाने में सहायक - बड़े दुधारू पशु (गाय/भैंस) में रोजाना 40-50 ग्राम सरसों का तेल खिलाने से पशु की उत्पादन क्षमता बढती है|
  • रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढाता है- सरसों के तेल के सेवन से पशु की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढती है| मात्रा - 25-50 ग्राम रोजना (बड़े पशु के लिए)
  • नियमित सरसों का तेल खिलाने से पशु को अफारा होने की सम्भावना कम हो जाती है|
  • गर्भवती पशु को सरसों का तेल खिलाने से बच्चे का विकास अच्छा होता है|
  • अगर पशु की लेवटी/गादी पर सूजन है तो सरसों के तेल को हल्का गरम करके सुजन वाली जगह पर मालिश करने से सूजन कम हो जाती है और दर्द में भी राहत मिलती है|
  • सरसों के तेल में हल्दी मिलाकर घाव पर लगाने से घाव में संकर्मण नही होता तथा घाव जल्दी भरता है|
  • अगर पशु को अफारा हो गया है तो पशु को 100ml सरसों के तेल में 25ग्राम हींग मिलाकर खिलाने से अफारा से राहत मिलती है|
  • अगर किसी पशु को नियमित सरसों का तेल खिलाया जा रहा हो तो उस पशु को भीषण गर्मी में लू लगने की सम्भावना कम हो जाती है|
  • जोड़ दर्द में हलके गरम सरसों के तेल की मालिश करने से दर्द में राहत मिलती है|
  • सरसों का तेल नियमित तौर पर पशु को खिलाने से दूध में वसा\फैट की मात्रा बढती है|
  • ब्याने के बाद अगर भैंस की चमड़ी का रंग लाल होने लगे तो उस पशु को सरसों का तेल खिलाना शुरू करे इससे चमड़ी का रंग लाल न होकर काला ही रहेगा |
खुराक - भेड़/बकरी 10-20ml रोजाना |गाय/भैंस 40-50ml रोजाना|

नोट- सरसों का तेल पशु को खिलाने से पहले नजदीकी पशु चिकित्सक की सलाह ले | सरसों के तेल को हमेशा पकाकर पशु को खिलाये | इसे कभी कच्चा ने खिलाये| सरसों का तेल रोजाना पशु को लगातार न खिलाये | इसे सप्ताह में सिर्फ 4-5 दिन ही खिलाये|

Friday, 6 March 2026

गड्तुम्बा के चमत्कारिक गुण|

गड्तुम्बा/इन्द्रायण





 गड्तुम्बा रेगिस्तानी इलाको में पाया जाने वाला एक कड़वा फल है| जो एक छोटे तरबूज जैसा दिखाई देता है| इसका स्वाद कड़वा होता है| इसका वैज्ञानिक नाम Citrullus Colocynthis है| हिंदी में इसके कई नाम है जैसे की इन्द्रायण, तुम्बा, गड्तुम्बा इत्यादि|

यह एक जंगली पौधा है| जो रेगिस्तानी इलाको में उगता है| यह फल औषधियों गुणों से भरपूर है| जो कई प्रकार की बीमारियों में काम में लिया जा सकता है| ज्यादातर यह कृमिनाशक के तौर पर प्रयोग में लिया जाता है| इसके अलावा इसके काफी फायदे है, जिसका विवरण निम्न प्रकार है-

  • गाय, भैंस, भेड़, बकरी व ऊँट में इसका प्रयोग पेट के कीड़े मारने के लिए किया जाता है| मात्रा - भेड़ व बकरी या छोटे बछड़े में 20-25 ग्राम| गाय व भैंस - 200-250 ग्राम|
  • पशुओ में पेट से सम्बंधित किसी भी समस्या (कब्ज, अफारा, दस्त) के निवारण के लिए इसका प्रयोग किया जाता हो| मात्रा - बड़े पशु में 100 ग्राम दिन में दो बार आराम होने तक|
  • पशुओ में पाचन शक्ति बढाने के लिए भी इसका प्रयोग किया जाता है| मात्रा 1-2 ग्राम प्रति 100 किलोग्राम शारीरिक भार|
  • पशु के थन, लेवटी या जोड़ पर सुजन को भी ठीक करता है| प्रयोग - सम्बंधित भाग पर इसकी चटनी बनाकर लगाये|
  • यह पशु की रोगप्रतिरोधक क्षमता को भी बढाता है| मात्रा 1-2 ग्राम प्रति 100 किलोग्राम शारीरिक भार|
  • पशुओ के जोड़ो के दर्द को भी ठीक करता है| मात्रा - 1-2 ग्राम प्रति 100 किलोग्राम शारीरिक भार|

नोट- इसे पशु को खिलाते समय मात्रा का ध्यान रखे | अधिक मात्रा विषाक्त हो सकती है| किसी भी बीमारी में पशु को खिलाने से पहले पशु चिकित्सक की सलाह अवश्य ले|

Wednesday, 4 March 2026

नीम एक गुणकारी औषधि के पशुओ में होने वाले फायदे |

 नीम



नीम का पेड़ भारत और इसके आस पास के देशो में सामान्यतः देखने को मिल जाता है| नीम एक बहुत ही गुणकारी पौधा है,  इसलिए भारतीय आयुर्वेद में नीम को बहुत महत्व दिया गया है| नीम के पेड़ के पत्ते , छाल और फल सभी का चिकित्सा में प्रयोग में लिया जाता है| नीम के पेड़ के हर भाग के अपने अलग गुण है| नीम के औषधीय गुणों के कारण इसका आयुर्वेद और आधुनिक हर्बल दवाइयों में बहुत प्रयोग किया जाता है| नीम में बहुत से antioxidant, anti-inflammatory और antimicrobial गुण होते है|

आयुर्वेदिक पशु चिकित्सा में भी नीम का बहुत महत्व है| नाम का प्रयोग पशुओ में विभिन्न प्रकार के संकर्मण को रोकने, पेट के कीड़े मारने, त्वचा सम्बन्धी बीमारियों में किया जाता है| नीम के औषधीय गुणों का विवरण इस प्रकार है-

  • नीम की कच्ची पतियों की चटनी बनाकर पशु को खिलाने से पेट के कीड़ो के संकर्मण का खतरा भी कम हो जाता है | मात्रा 1 ग्राम प्रति 100 किलो शारीरिक भार रोजाना|
  • अगर पहले से पेट में कीड़े हो तो वो भी मर जाते है|  मात्रा - 10 ग्राम प्रति 100 किलो शारीरिक भार |
  • नीम के पत्तो की चटनी को त्वचा पर लगाने से त्वचा सम्बन्धी रोग जैसे की दाद, खाज, खुजली जैसी समस्या से निजात मिलती है|
  • नीम के पत्तो की चटनी या नीम के तेल को चोट के दर्द, सुजन, जोड़ दर्द या घाव पर लगाने से आराम मिलता है|
  • रोजाना 2-5 ग्राम नीम के पत्ते पशु को खिलाने से पशु का पाचन सही रहता है | और पशु को भूख भी अच्छी लगती है|
  • 100-200 ग्राम रोजाना 5-10 दिन तक नीम की पत्तियों का काढ़ा पशु को पिलाने से लम्बे समय से चल रही त्वचा की बीमारिया ठीक हो जाती है|
  • नीम की पतियों की चटनी या नीम की छाल की चटनी घाव, फोड़े, फुंसी पर लगाने से ये सब ठीक हो जाती है|
  • 1-2ml नीम के तेल को 1 लीटर पानी में मिलाकर पशु के शरीर पर छिडकाव करने से मक्खी,मछर, जूं, किलनी और चिचड पशु के पास नही आते|
  • जोड़ दर्द या मोच वाली जगह पर नीम के तेल की मालिश करने से दर्द और सुजन में राहत मिलती है|
  • नीम के पत्तो को पानी में उबालकर पानी को रख ले और रोजाना दूध निकालने के बाद इस पानी को थनों पर लगाने से थनेला रोग होने की सम्भावना काफी हद तक कम हो जाती है| और इस पानी से पशु के खुर धोने से खुरो की समस्या से राहत मिलती है|
  • नीम की खल प्रोटीन का अच्छा स्रोत है इसे खिलाने से पशु की सेहत अच्छी रहती है और पशु का उत्पादन भी बढ़ता है|
  • नीम के पत्तो का धुँआ करने से आस पास के मक्खी और मच्छर दूर भाग जाते है|
किसी भी प्रकार के नुस्खे का प्रयोग करने से पहले अपने नजदीकी पशु चिकित्सक या आयुर्वेदिक पशु चिकित्सक से अवश्य परामर्श करे|

Sunday, 1 March 2026

ECTOPARASITES

ECTOPARASITES

DELTAMETHRINE

Affective against ectoparasites.

Availability:

12.5% solution 15ml, 50ml, 250ml and 1litre packing

Direction for use:

0.1-0.V% solution in water applied topically on the skin of animal for10-15 mins and after animal should be washed. Licking should be prohibited.

Brands:

Butox (MSD)

Tinix (Intas)


CYPERMETHRINE 10%

Affective against extoparasites.

Availability:

10% solution 15ml, 50mlml 250ml and 1litre packing

Direction for use:

0.2-0.3% solution in water applied topically of the animal skin for 10-15 mins and after animal should be washed, licking should be prohibited.

Brands:

Clinar (Virbac)

Dermeez (Zydus)

Ect Our (Prima Vet Care) etc.



CYPERMETHRINE 1%

Affective against ectoparasites.

Avalability:

1% solution 3ml, 50ml and 500ml packing

Dosage:

1ml/10kg b.wt applied on the spinal region of the animal for one hour.

Brands:

Flumitas (Intas)

Poraon (Alembic)

Flupor (Zydus) etc.

ANTHELMINTICS

 ANTHELMINTICS

ALBENDAZOLE

Affective of round worms, tape worms, flukes and larva.

Not safe in pregnancy.

Availability:

1.5gm and gm Bolus

Dosage:

5-10mg/kg b.wt orally single dose (can be repeated after 10-15 days)

Brands:

Alzol Vet (Vets Pharma)

Albomar (Virbac)

Bankikind (Vet Mankind) etc.



Fenbendazole

Affective of round worms, tape worms, flukes and larva.

Its Pregnancy safe.

Availability:

100mg Tab

1500mg bolus

3000mg Bolus

Dosage:

5-7.5mg/kg b.wt orally single dose 

Brands:

Fenzole 150mg

Fenomor 150mg (Virbac)

Fenbenzole 1500mg (Zydus)

Fentas 1500mg and 3000mg (Intas)

Panacur 150mg. 1500mg, 3000mg (MSD)

All Clear Bolus 3000mg (Cargil)

ANTI FUNGALS

ANTI FUNGALS 

KETOCANAZOLE

Prohibits the synthesis of ergosterol which affects the working of cell membrane.

Availability:

200mg Tab.

Dosage:

10mg/kg b.wt.

Brands:

Fungizole (Psycorem) , Nizral (J&J)



CLOTRIMAZOLE

Antifungal drug.

Availability:

1% w/w ointment, powder and gel

Dosage:

Used topically on the affected area.

Brands:

Candid (powder/cream/gel)

पेशाब रुक रुक कर आना |

पशुओ में पेशाब करने में कठिनाई होना पशुओं में पेशाब रुक रुक कर आना या बार बार थोड़ा थोड़ा पेशाब करना एक सामान्य सी बीमारी लगता है लेकिन कई बार...