सरसों का तेल
सरसों के तेल को इसके औषधीय गुणों के कारण आयुर्वेद में बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है| उत्तर भारत में इसे बहुत अधिक मात्रा में प्रयोग में लिया जाता है| जिस प्रकार मनुष्यों में इसके बहुत से फायदे है उसी प्रकार पशुओ में भी सरसों के तेल के बहुत ही चमत्कारिक फायदे है\ जैसे की|-
- दूध बढ़ाने में सहायक - बड़े दुधारू पशु (गाय/भैंस) में रोजाना 40-50 ग्राम सरसों का तेल खिलाने से पशु की उत्पादन क्षमता बढती है|
- रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढाता है- सरसों के तेल के सेवन से पशु की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढती है| मात्रा - 25-50 ग्राम रोजना (बड़े पशु के लिए)
- नियमित सरसों का तेल खिलाने से पशु को अफारा होने की सम्भावना कम हो जाती है|
- गर्भवती पशु को सरसों का तेल खिलाने से बच्चे का विकास अच्छा होता है|
- अगर पशु की लेवटी/गादी पर सूजन है तो सरसों के तेल को हल्का गरम करके सुजन वाली जगह पर मालिश करने से सूजन कम हो जाती है और दर्द में भी राहत मिलती है|
- सरसों के तेल में हल्दी मिलाकर घाव पर लगाने से घाव में संकर्मण नही होता तथा घाव जल्दी भरता है|
- अगर पशु को अफारा हो गया है तो पशु को 100ml सरसों के तेल में 25ग्राम हींग मिलाकर खिलाने से अफारा से राहत मिलती है|
- अगर किसी पशु को नियमित सरसों का तेल खिलाया जा रहा हो तो उस पशु को भीषण गर्मी में लू लगने की सम्भावना कम हो जाती है|
- जोड़ दर्द में हलके गरम सरसों के तेल की मालिश करने से दर्द में राहत मिलती है|
- सरसों का तेल नियमित तौर पर पशु को खिलाने से दूध में वसा\फैट की मात्रा बढती है|
- ब्याने के बाद अगर भैंस की चमड़ी का रंग लाल होने लगे तो उस पशु को सरसों का तेल खिलाना शुरू करे इससे चमड़ी का रंग लाल न होकर काला ही रहेगा |
खुराक - भेड़/बकरी 10-20ml रोजाना |गाय/भैंस 40-50ml रोजाना|
नोट- सरसों का तेल पशु को खिलाने से पहले नजदीकी पशु चिकित्सक की सलाह ले | सरसों के तेल को हमेशा पकाकर पशु को खिलाये | इसे कभी कच्चा ने खिलाये| सरसों का तेल रोजाना पशु को लगातार न खिलाये | इसे सप्ताह में सिर्फ 4-5 दिन ही खिलाये|

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