नीम
नीम का पेड़ भारत और इसके आस पास के देशो में सामान्यतः देखने को मिल जाता है| नीम एक बहुत ही गुणकारी पौधा है, इसलिए भारतीय आयुर्वेद में नीम को बहुत महत्व दिया गया है| नीम के पेड़ के पत्ते , छाल और फल सभी का चिकित्सा में प्रयोग में लिया जाता है| नीम के पेड़ के हर भाग के अपने अलग गुण है| नीम के औषधीय गुणों के कारण इसका आयुर्वेद और आधुनिक हर्बल दवाइयों में बहुत प्रयोग किया जाता है| नीम में बहुत से antioxidant, anti-inflammatory और antimicrobial गुण होते है|
आयुर्वेदिक पशु चिकित्सा में भी नीम का बहुत महत्व है| नाम का प्रयोग पशुओ में विभिन्न प्रकार के संकर्मण को रोकने, पेट के कीड़े मारने, त्वचा सम्बन्धी बीमारियों में किया जाता है| नीम के औषधीय गुणों का विवरण इस प्रकार है-
- नीम की कच्ची पतियों की चटनी बनाकर पशु को खिलाने से पेट के कीड़ो के संकर्मण का खतरा भी कम हो जाता है | मात्रा 1 ग्राम प्रति 100 किलो शारीरिक भार रोजाना|
- अगर पहले से पेट में कीड़े हो तो वो भी मर जाते है| मात्रा - 10 ग्राम प्रति 100 किलो शारीरिक भार |
- नीम के पत्तो की चटनी को त्वचा पर लगाने से त्वचा सम्बन्धी रोग जैसे की दाद, खाज, खुजली जैसी समस्या से निजात मिलती है|
- नीम के पत्तो की चटनी या नीम के तेल को चोट के दर्द, सुजन, जोड़ दर्द या घाव पर लगाने से आराम मिलता है|
- रोजाना 2-5 ग्राम नीम के पत्ते पशु को खिलाने से पशु का पाचन सही रहता है | और पशु को भूख भी अच्छी लगती है|
- 100-200 ग्राम रोजाना 5-10 दिन तक नीम की पत्तियों का काढ़ा पशु को पिलाने से लम्बे समय से चल रही त्वचा की बीमारिया ठीक हो जाती है|
- नीम की पतियों की चटनी या नीम की छाल की चटनी घाव, फोड़े, फुंसी पर लगाने से ये सब ठीक हो जाती है|
- 1-2ml नीम के तेल को 1 लीटर पानी में मिलाकर पशु के शरीर पर छिडकाव करने से मक्खी,मछर, जूं, किलनी और चिचड पशु के पास नही आते|
- जोड़ दर्द या मोच वाली जगह पर नीम के तेल की मालिश करने से दर्द और सुजन में राहत मिलती है|
- नीम के पत्तो को पानी में उबालकर पानी को रख ले और रोजाना दूध निकालने के बाद इस पानी को थनों पर लगाने से थनेला रोग होने की सम्भावना काफी हद तक कम हो जाती है| और इस पानी से पशु के खुर धोने से खुरो की समस्या से राहत मिलती है|
- नीम की खल प्रोटीन का अच्छा स्रोत है इसे खिलाने से पशु की सेहत अच्छी रहती है और पशु का उत्पादन भी बढ़ता है|
- नीम के पत्तो का धुँआ करने से आस पास के मक्खी और मच्छर दूर भाग जाते है|

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